| इतिहास - हरियाणा जनहित कांग्रेस |
२ दिसम्बर २००७ का दिन, हरियाणा राज्य के इतिहास मे तब एक सुनहरा अध्याय लेकर आया .जब प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले माननीय चौधरी भजन लाल जी के सरंक्षण एवं उर्जावान युवा नेता चौधरी कुलदीप बिश्नोई जी के नेतृत्व में हरियाणा की जनता ने स्वयं के हित में लड़ने का संकल्प लेते हुए ,रोहतक की विशाल रैली में हरियाणा जनहित कांग्रेस (बी एल ) की स्थापना की I
यह पार्टी सरंक्षक चौधरी भजन लाल जी की लोकप्रियता का परिणाम था कि, हरियाणा कि जनता ने उन्हें तीन बार हरियाणा का मुख्यमंत्री पद देकर प्रदेश की सेवा का अवसर दिया I चौधरी भजन लाल जी के सत्ता छोड़ देने के बाद वर्ष १९९६ में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने पर मिलीजुली सरकारों के प्रयोग का दौर शुरू हुआ , जो कि असफल रहा I चाहें तो हविपा -भाजपा गठजोड़ हो या इनेलो भाजपा गठजोड़, जनता कि समस्याएँ बढती ही गयी I इससे त्रस्त होकर हरियाणा कि जनता ने पुनः भजन लाल जी के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए ,कांग्रेस पार्टी को २००५ चुनाव में दो तिहाई बहुमत से जिताकर विधानसभा में भेजा किन्तु जन इच्छाओं को ठोकर मारते हुए ,कांग्रेस नेतृत्व ने ,एक गैर विधायक ,अनुभवहीन व्यक्ति को प्रदेश नेतृत्व सौंप दिया I यह प्रदेश कि जनता के साथ ,उनके विश्वास के साथ ,कांग्रेस पार्टी का विश्वास घात था I बात यहीं तक सीमित नही थी ,बल्कि , इस सरकार के गठन के बाद ,हरियाणा में निरंकुशता एवं अराजकता का जो दौर शुरू हुआ वह अकथ्य है I चाहे वो आम आदमी हो ,व्यापारी हो ,किसान हो या मजदूर ,सभी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे थे I ऐसे में कांग्रेस ने एस.इ.जेड के नाम पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के किसानो की करीब एक लाख करोड़ की बेशकीमती जमीन हथियाकर ,इसे महज ३८२ करोड़ में एक निजी कंपनी को बेचकर अपने ही प्रदेश के किसानो के साथ धोखा करके अपनी 'विश्वासघात' की परम्परा को आगे बढाया I
इन सभी समस्याओं से त्रस्त होकर एवं सरकार के मनमाने पूर्ण रवैये को देखते हुए एक बार पुनः हरियाणा की जनता ने चौधरी भजन लाल जी एवं चौधरी कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व में आस्था दिखाते हुए ,२ दिसम्बर २००७ को खुद अपनी लड़ाई लड़ने का बिगुल फूंक दिया और जनता के हितों की रक्षा के लिए हरियाणा जनहित कांग्रेस (बी एल ) के नाम से एक नयी पार्टी का गठन किया ,एक ऐसी पार्टी जो उनके हितों के लिए कोई भी क़ुरबानी देने के लिए तैयार है ,एक ऐसी पार्टी जो उनके हितों के लिए संघर्ष का कोई भी रास्ता चुनने में हिचकिचाती नहीं ,एक ऐसी पार्टी जो एक साझा संघर्ष का मंच है,जिसमे हर वर्ग साझीदार है,एक ऐसी पार्टी जो किसी क्षेत्र विशेष या जाति विशेष की राजनीती नहीं करती I
यह संघर्ष की यात्रा अनवरत जारी है और तब तक चलती रहेगी जब तक कि हरियाणा जनहित कांग्रेस (बी एल ) लोगों के विश्वास कि कसौटी पर खरी उतरती हुई उसकी अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं को मूर्त रूप नही दे देती I
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