| मुद्दे एवं समस्ये - हरियाणा जनहित कांग्रेस |
कुशासन व कुव्यवस्था
चौधरी भजनलाल के १९९६ में सत्ता छोड़ने के बाद प्रदेश में गठबंधन की राजनीती का जो प्रयोग शुरू हुआ उसने हरियाणा में कुशासन और कुव्यवस्था के सारे प्रतिमानों को तोड़ दिया. आम आदमी अपने आपको इस राज में असुरक्षित महसूस करने लगा. इसके बाद आयी कांग्रेसी सरकार ने इस कुव्यवस्था को कम करने के बजाय बढ़ावा ही दिया.
बेरोज़गारी
रोजगार सृजन की परवर्ती सरकारों ने भरपूर उपेक्षा की. सरकारों की गलत नीतियों के कारण प्रतिभाशाली युवाओं के सामने अपने सुनहरे भविष्य के सपने टूटते देखने के सिवा कोई चारा नहीं था. बेरोज़गारी हटाने के नाम पर एस. इ. जेड. बनाने का काम शुरू किया गया और किसानों की ज़मीनें मनमाने ढंग से हड़प ली गयीं. कृषि योंग्य ज़मीनों को औद्योगिक घरानों को कौड़ियों के भाव बेच दिया गया.
बिजली पानी
आज प्रदेश में बिजली कटौती आम बात है. सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है और समस्या का समाधान खोजने का कोई प्रयास होता नहीं दिख रहा है. विधान सभा चुनावों में एस. वाई. एल. का पानी लाने का वादा करने वाली कांग्रेस सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को दरकिनार कर चुकी है.
भ्रष्टाचार
मिली जुली सरकारों के परायों ने जहाँ सुद्रढ़ प्रशासन को कमज़ोर किया वहां पर भ्रष्टाचार को पनपने का भरपूर अवसर प्रदान किया. पिछली सरकार ने भ्रष्टाचार पर काबू करना तो दूर, वह खुद भी इसमें आकंठ डूबी दिखाई दी.
आधारभूत सुविधाएँ
पिछले कुछ सालों में हरियाणा में आधारभूत सुविधाओ के विकास के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया. सड़कें खस्ताहाल है, कृषि बेहाल और व्यापारी वर्ग भय ग्रस्त है
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